विज्ञान और ज्ञान में क्या अंतर है?

विज्ञान और ज्ञान में क्या अंतर है?
विज्ञान का सीधा-सा अर्थ है-वस्तुओं की तमाम जानकारी हासिल करना। यदि ज्ञान को समझें तो ज्ञान का मतलब मानवीय मूल्यों के अनुरूप चिंतन करना और चरित्र के लिए आस्थावान बनना है।
विज्ञान का अर्थ है-विशेष ज्ञान, खास जानकारी। ... कई व्यक्ति ऐसा कहते पाये जाते हैं- क्या करें मन नहीं मानता, हम तो ऐसा ...
विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग से मिलती है, जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धान्तों को जानने के लिये किये जाते हैं। ... इस प्रकार हम कह सकते हैं कि किसी भी विषय के क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कहते है।
ज्ञान क्या है
ज्ञान दो प्रकार से है
1 अक्षर ज्ञान
2 तत्वज्ञान
ज्ञान का मतलब है मानव जीवन में अच्छा करके सुख प्राप्त करना है।।
माननीय जीवन अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना है।
1 अक्षर ज्ञान
वर्तमान में जो शिक्षा दी जाती है अध्यापकों द्वारा उसे कहते हैं अक्षर ज्ञान
अक्षर ज्ञान से मानव अच्छे बुरे का अनुभव समझ सकता है किस कार्य को किस प्रकार करने से विज्ञान की ओर बढ़ेंगे किसी चीज में पारंगत हो कर विज्ञान में श्रेष्ठ प्रदान करना है।।
2 तत्वज्ञान
यह हमारे वेदों और शास्त्रों के द्वारा संतों में महर्षि द्वारा दिया जाता है परंतु वर्तमान में अनेक संतों ने तत्वज्ञान को अर्थात वेदों और शास्त्रों का सहारा लेकर अपनी रोजी रोटी का धंधा बना दिया है जैसे कथावाचक  करके मानव समाज को भ्रमित करता है।।
मैं एक पूर्ण संत होता है जो मानव को तत्व ज्ञान प्रदान करते हैं तत्वज्ञान उसे कहते हैं मानव बुराई छोड़कर अच्छाई की ओर बढ़ता है जो कार्य अक्षर ज्ञान विज्ञान से नहीं होता है वह कार्य तत्वज्ञान से होता है उसको समझ कर उसकी नियम मर्यादा में रहकर भक्ति क्रिया करने पर
पूर्ण संत उसे कहते हैं जो श्रीमद भगवत गीता के अनुसार ज्ञान बताते हैं श्रीमद भगवत गीता में पूर्ण संत की पहचान बताइए चार वेद छह शास्त्र 18 पुराण का पूरा ज्ञान रखता है वह पूर्ण संत गीता अध्याय 15 श्लोक  1 से 4 तक उल्टे लटके हुए वृक्ष अर्थ बताएगा।।
वर्तमान में पूर्ण सतगुरु रामपाल जी महाराज है जो तत्व ज्ञान देते हैं मानव इस ज्ञान को समझ कर नशा मुक्त हो रहा रोग मुक्त हो रहा दहेज मुक्त विवाह कर रहा है समाज में फैली पाखंडवाद समाप्त हो रहा है।।
वेदों में प्रमाण है कि सहादत भक्ति मर्यादा में रहकर और संत द्वारा भक्ति करता है तो परमात्मा उसके असाध्य रोग ठीक कर देते हैं।।
वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज द्वारा की भक्ति से लोगों के कैंसर एड्स अस्थमा उजड़े हुए परिवार वैसे है इनके हजारों प्रमाण उनकी वेबसाइट पर मिल जाएगा
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www.jagatgururampalji.org

सतगुरु की पहचान संत गरीबदास जी की वाणी में -
”सतगुरु के लक्षण कहूं, मधुरे बैन विनोद। चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।।“
पूर्ण संत चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा।
सभी सद्ग्रन्थों के पूर्ण जानकर संत रामपाल जी महाराज हैं जो सतभक्ति देकर मानव को सभी बुराइयों से दूर कर रहे हैं।

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