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महामारी क्यों आती है

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महामारी क्यों आती है पौराणिक तत्वों के अनुसार जाने तो महामारी हर 100 वर्ष के बाद आते हैं।। धार्मिक धर्म ग्रंथों की माने तो कि पृथ्वी पर पाप बढ़ जाने के कारण महामारी आती है।। वेद शास्त्रों के अनुसार जाने-    श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है पृथ्वी पर मानव झूठ बोलने मांस मदिरा आदि करने पर व मिलावट करके प्राकृतिक वस्तुओं के साथ छेड़छाड़ करना आदि कारण से प्रकृति अपना समय-समय पर रूप दिखाती है।। वर्तमान में बचाव का उपाय-     1  श्रीमद भगवत गीता में प्रमाण है जब-जब धर्म की हानि होगी तब कोई महान पुरुष या परमात्मा धरती पर आकर मानव को ध्यान देकर सत्य बोलना वेदों और शास्त्रों के अनुसार सत भक्ति बता कर मानवीय संकट से बचाना।। 2 शास्त्र अनुकूल भक्ति नहीं करने के कारण पाप कर्म बढ़ जाते हैं जिससे महामारी वे प्राकृतिक घटनाएं होती हैं।। वर्तमान में बचाव का उपाय- संत रामपाल जी महाराज बता रहे हैं वेदों और शास्त्रों के अनुसार सद्भक्ति देखकर लाखों लोग सुखी जीवन जी रहे हैं ।। वेदों में प्रमाण है कि परमात्मा साधक के असाध्य रोग ठीक कर देते हैं। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के शिष्य ...

विज्ञान और ज्ञान में क्या अंतर है?

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विज्ञान और ज्ञान में क्या अंतर है? विज्ञान का सीधा-सा अर्थ है-वस्तुओं की तमाम जानकारी हासिल करना। यदि ज्ञान को समझें तो ज्ञान का मतलब मानवीय मूल्यों के अनुरूप चिंतन करना और चरित्र के लिए आस्थावान बनना है। विज्ञान का अर्थ है-विशेष ज्ञान, खास जानकारी। ... कई व्यक्ति ऐसा कहते पाये जाते हैं- क्या करें मन नहीं मानता, हम तो ऐसा ... विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग से मिलती है, जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धान्तों को जानने के लिये किये जाते हैं। ... इस प्रकार हम कह सकते हैं कि किसी भी विषय के क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कहते है। ज्ञान क्या है ज्ञान दो प्रकार से है 1 अक्षर ज्ञान 2 तत्वज्ञान ज्ञान का मतलब है मानव जीवन में अच्छा करके सुख प्राप्त करना है।। माननीय जीवन अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना है। 1 अक्षर ज्ञान वर्तमान में जो शिक्षा दी जाती है अध्यापकों द्वारा उसे कहते हैं अक्षर ज्ञान अक्षर ज्ञान से मानव अच्छे बुरे का अनुभव समझ सकता है किस कार्य को किस प्रकार करने से विज्ञान की ओर बढ़ेंगे किसी चीज में पारंगत हो कर विज्ञान में श्रेष्ठ प्रदान क...

भक्ति करना क्यों जरूरी

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भक्ति करना क्यों जरूरी भक्ति करने से मानव में विकार छोड़ने की शक्ति मिलती है बुराई को छोड़कर अच्छा की ओर आगे बढ़ता है।। शास्त्र अनुकूल भक्ति करने पर मानव अपने जीवन में मोक्ष की ओर बढ़ता है।। भक्ति करने पर मानव में पर्यावरण मानवता में प्यार बढ़ता है।। वर्तमान में शास्त्र अनुकूल भक्ति करने पर मानव के कैंसर जैसे असाध्य रोग ठीक होते हैं।। शास्त्र अनुकूल भक्ति वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज बताते हैं जिन का सपना है नशा मुक्त भारत ,दहेज मुक्त, भारत रोग मुक्त  भक्ति नहीं करने पर या नास्तिक होने पर भारत को छोड़कर चीन अमेरिका रसिया आदि में बौद्ध धर्म का प्रचार होने से यहां की जनता नाशवान हो गई आप नास्तिक हो गई मांस मदिरा का अधिक सेवन करती हैं या कच्चा मांस खा जाते हैं किससे वर्तमान में अनेक रोग उत्पन्न हो रहे हैं।। शास्त्रों में प्रमाण है कि मांस खाने पर शराब पीने पर यहां तो अनेक रोग होते हैं वे नर्क का भाग्य बनेगा इसलिए भक्ति करना जरूरी है।।

चीन देश नास्तिक क्यों

चीन देश नास्तिक क्यों जब उसे बचपन में प्रोत्साहित और बढ़ावा ही नहीं मिलेगा, तो वह नास्तिक ही रहेगा। क्योंकि नास्तिक वह है जो ईश्वर और धर्म को असली नहीं मानता। ऐसे में चीन में धार्मिक स्थलों को बनाना, पब्लिकली धार्मिक व्यवहार करना, राजनीति में धर्म का हस्तक्षेप आदि को हतोत्साहित किया जाता है। इसलिए चीन में नास्तिकों की संख्या अधिक कारण  1 वेदों और शास्त्रों में वर्णन है कि जो व्यक्ति मांस खाते हैं उसमें दया नहीं होती है जिसमें दया नहीं होती है वह धर्म को नहीं मानते हैं। 2 चीन में बौद्ध धर्म होने के कारण बौद्ध धर्म एक नास्तिक धर्म है। 3 जब आप मांस खाते हो और दूसरी तरफ परमात्मा को याद करते हो तो परमात्मा आपको सुख नहीं देते हैं अर्थात आपसे एक प्रश्न होते हैं। 4 बौद्ध धर्म में भक्ति करने पर सुख नहीं मिलने के कारण मानव नास्तिकता की ओर गए भारत और चीन में अंतर भारत  भारत में चीन जितनी जीव हिंसा नहीं होती हैं इस कारण मानव किसी ने किसी धर्म को मानते हुए वेदों और शास्त्रों के अनुसार यज्ञ हवन करते हैं जिससे आ...

Kabirparmeshwar

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भगवान श्री कृष्ण को विष्णु जी का अवतार माना जाता है। इनकी अनेक है सुनने को मिलती है। इनका जन्म मां के गर्भ  से हुआ है । उनके जन्मदिन को संसार वासी जन्माष्टमी के नाम से पूछते हैं।  लीलाएं भगवान श्री कृष्ण जी ने ताम्रध्वज के बेटे मोरध्वज को आरे से चिरवा कर उसे पुणे है  मनुष्य जीवन दिया। लेकिन महाभारत के युद्ध में उनके अपने भांजे सुमित्रा के पुत्र अभिमन्यु को जीवित नहीं कर सके । लेकिन परमेश्वर कबीर जी का मां के गर्भ से जन्म नहीं हुआ है। शिशु रूप में कमल के फूल पर अवतरित हुई है लहरतारा तालाब पर में  परमेश्वर कबीर जी का जन्म मृत्यु नहीं होता है शहर शरीर आते हैं और सहश रिर ही जाते हैं। इनका जन्मदिन नहीं मनाया जाता है केवल प्रकट दिवस मनाया जाता है परमेश्वर कबीर जी का परमेश्वर कबीर जी शरीर छोड़कर गए तब उनके स्थान पर फूल मिले आज भी मगर में एक मस्जिद और एक मंदिर बना हुआ है।

mahaveerJain

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महावीर जैन को पूर्ण मोक्ष नहीं मिला है 

Bible

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बाइबिल में सृष्टि रचना का प्रमाण           पवित्रा बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1ः20 - 2ः5 पर) छटवां दिन :- प्राणी और मनुष्य : अन्य प्राणियों की रचना करके 26. फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाऐं, जो सर्व प्राणियों को काबू रखेगा। 27. तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टि की। 29. प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं (मांस खाना नहीं कहा है।) सातवां दिन :- विश्राम का दिन : परमेश्वर ने छः दिन में सर्व सृष्टि की उत्पत्ति की तथा सातवें दिन विश्राम किया। पवित्रा बाईबल ने सिद्ध कर दिया कि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप (आकार) जैसा बनाया। इसलिए सिद्ध हुआ कि परमात्मा नराकार अर्थात् मानव सदृश शरीर युक्त है, जिसने छः दिन में सर्व सृष्टि की रचना की तथा फिर विश्राम किया।             ...